वास्तविक जीवन में तेड़‌े पेड़ और सीधे पेड़ की सच्चाई


चाणक्य कहते हैं, जंगल में जो पेड़ सीधा होता वह जल्दी काटा जाता है। और जो पेड़ जितना तेढ़ा होता है वह उतना ही देर से काटा जाता है। चाणक्य का यह श्लोक का मतलब क्या है?
यह बात तो हम सभी लोग जानते हैं। सीधा पेड़ काटने में उतना दिक्कत होता नहीं है, जितना दिक्कत टेढ़े मेढ़े पेड़ को काटने में होता है।
पर चाणक्य की इस बात का मतलब कुछ और है। यह बात सिर्फ जंगल में जुड़े हुए पेड़ के बारे में नहीं है। यह बात हमारे जीवन का वह सच्चाई है जिसे जानने के बाद हम सभी लोग कहेंगे, “जी हां बात तो आपने सही कही”। 90% लोग बात को सच मानेंगे। पर इस बात को दोहराएंगे नहीं, ना कि इस बात को अपने जीवन में व्यवहार करेंगे।
क्योंकि चाणक्य की यह बात हमारे जीवन का उतना ही सच है जितना सच हमारे जिंदा रहने की वजह ऑक्सीजन है। जीवन में सभी लोग आगे बढ़ना चाहते हैं। पर आगे बढ़ने में हम इतना ही डूब जाते हैं कि हमें यह ध्यान नहीं रहता है कि कौन या फिर किसको हमने पीछे छोड़ दिया है।
आगे बढ़ने के लिए जीवन में दो रास्ते होते हैं। एक रास्ता जहां पर आप अपने खुद के दम पर लोगों को साथ लेकर आगे बढ़ते हैं। दूसरी तरफ जो रास्ता है उस रास्ते पर आप आगे बढ़ते हैं। पर दूसरों को कुचल कर आगे बढ़ते हैं। आपको उस रास्ते पर ध्यान ही नहीं रहता है किसको आपने अपने पैरों तले कुचल डाला है।
चाणक्य की उस श्लोक में जहां पर चाणक्य ने कहा है सीधे पेड़ को जल्द ही काटा जाता है।
इस सीधा पेड़ को हम अपने वास्तविक जीवन में दो तरीके की मनुष्य के साथ कल्पना कर सकते हैं। एक तरह की मनुष्य जो सीधे साधे होते हैं। सीधे-साधे होने का मतलब हम यहां पर आपको यह समझाना चाहते हैं कि, आप एकदम ही सीधे-साधे। आपको जो समझाया गया है आप वही समझते हो, उसके अलावा आपको कुछ समझ में नहीं आता है। अगर आपको कोई बोलेगा आप समुंदर में कूद जाओ तो आपका भला होगा भले ही आप तैरना नहीं जानते हो पर आप उनके ऊपर विश्वास करके कूद जाते हो। क्या आप लोग इस तरह के आदमी को सीधे-साधे बोलेंगे या फिर इस तरह के आदमी को बेवकूफ बोलेंगे?
दूसरी तरफ वह सीधा साधा आदमी जो सिर्फ अपने काम से ही काम रखता है। दूसरों के काम में अपना दखल अंदाज नहीं करता है। और हर वक्त अपनी राह पर ही चलता है। जिसको क्या अच्छा है और क्या बुरा है इसमें तफत नजर आता है। क्या आप इस तरह के आदमी को सीधा साधा आदमी नहीं कहेंगे? अवश्य हम लोग इस तरह के आदमी को ही सीधा साधा आदमी कहेंगे।
इस तरह के सीधे-साधे आदमी हर वक्त अपने रास्ते पर चलते हैं। और किसी का बुरा सोचने का इनका मौका ही नहीं मिलता है। यह लोग सिर्फ अपने काम से ही मतलब रखते हैं। और हर वक्त दूसरों का भला करने का भी सोचते हैं।
दूसरी तरफ चाणक्य ने कहा है जो पेड़ जंगल में तेढ़े मेढ़े होते हैं, उन्हें देरी से काटा जाता है।
अगर आप इस तरह की पेड़ को अपने वास्तविक जीवन के साथ मिलाएंगे, तो आपको वह लोग दिखाई देंगे जो लोग यह सोचते हैं। अगर उनको आगे बढ़ना है तो दूसरों को कुचल कर ही उन्हें सफलता प्राप्त होगी।
इस तरह के लोग आपको अपने जीवन काल में सबसे ज्यादा देखने को मिलेंगे। अगर आप हिसाब लगाएंगे तो आपको 90% लोग इस तरह के मिलेंगे। बहुत ही कम लोगों के पास यह शक्ति होती है कि वह अपने साथ औरों को भी अपने रास्ते में शामिल कर ले। और यही वजह है, यही सच्चाई है कि आप अपने जीवन काल में 90% लोग ऐसा देखेंगे जोकि खुद के बारे में ही सोचते होंगे। अगर उन्हें दूसरों के बारे में सोचने का मौका मिलेगा तो ही सोचेंगे नहीं तो नहीं सोचेंगे।
यह 90% लोग बहुत ही चालाक होते हैं अपने काम को हासिल करने के लिए दूसरों के पीठ पर छोरा भोग देते हैं, और अपना काम निकाल लेते हैं। दूसरों के साथ अन्याय करते करते यह अपना दाल इतना प्रसारित करते हैं और इतना टेढ़े मेढ़े हो जाते हैं की उन्हें जब काटा जाता है तब बहुत ही बेरहमी से काटा जाता है।
चाणक्य ने जो बात बताई है उसको हम फिर से दौहराते हैं। जो पेड़ जितना सीधा होता है वह जल्द ही काटा जाता है। और जो पेड़ जितना टेढ़े मेढ़े होता है वह उतना ही देर से काटा जाता है।
अगर आप अपने जीवन में किसी को बुरी तरह से नहीं देखा है, या फिर किसी का बुरा नहीं किया है। और आप अपने जीवन के हर वक्त सत्ता और निष्ठावान से निभाया है। तो निश्चित रूप से आप अपना जीवन एक सीधे पेड़ की तरह सरल तरीके से कांटे होंगे। और साथ ही साथ आपने बहुत सारे अच्छे बिज बोये होंगे। जिसके पश्चात जब आप इस दुनिया में नहीं भी होंगे तभी भी आपका उ बिज बड़ा हो कर फल देगा। जिस तरह एक सीधे पेड़ को काटकर अलग अलग चीज और अच्छी तरीके से बनाया जाता है।
पर अगर आपके जीवन बुरे कर्मों से भरा हुआ है, तो आपको यह वक्त आएगा जब आपको डर लगने लगेगा। कि आपके साथ अब क्या होने वाला है? आपने अपना कुकर्म के डाल इतने फैलाए रखे हैं जिस तरह से एक टेढ़े मेढ़े पेड़ अपने डाल फैलाया रखता है।
अंतिम में जब आपका जीवन का अंत हो जाएगा तब आप देखेंगे कि आपने खुद के पूरे जीवन काल में कुछ भी ऐसा नहीं किया है, कि मरने के बाद भी आपका वह काम याद रखें। या फिर आपका वह काम किसी दूसरे का भी भला करें। जैसा कि एक सीधा साधा आदमी अपने पूरे जीवनकाल व्यतीत करने के बाद भी कुछ बीज रख जाता है जो कि बाद में दूसरों का भी भला होता है।
मगर आपने अपने कुकर्म के वजह से ऐसा कुछ करने का मौका ही खो दिया, जिसके वजह से वह टेढ़े मेढ़े पेड़ के डाल काटने के बाद सिर्फ जलाने की ही काम आते हैं और कोई भी काम नहीं आता है।
अंतिम में हम आपको यही कहेंगे आप सरल बने पर बेवकूफ नहीं। आप चालाक बने मूर्ख नहीं।

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