मेंटली स्ट्रांग किसे कहेंगे | आप कितना मेंटली स्ट्रांग है

मेंटली स्ट्रांग किसे कहेंगे | आप कितना मेंटली स्ट्रांग है
मेंटली स्ट्रांग किसे कहेंगे | आप कितना मेंटली स्ट्रांग है
दुनिया में रहने के लिए हमें फिजिकली स्ट्रांग और मेंटली स्ट्रांग होना बहुत ही जरूरी हो जाता है। नहितो लोग आपको पीछे चोड़ जाएंगे। ओर अगर आप एकबार इस भागदौड़ भारी जिंदगी में पीछे पड़ जाएंगे तो फिर से सुरूबात से सुरु करना थोड़ा मुश्किल हो जाएगा।
मेंटली स्ट्रांग के बारे में बात करने से पहले चलिए बात करते है फिजिकल स्ट्रांग के बारे में। 

फिजिकल स्ट्रांग आप किसे कहेंगे?

फिजिकल स्ट्रांग आप उस व्यक्ति को कहेंगे जो मजबूत हो। आसानी से भारी से भारी काम कर लेता है। जिसके बॉडी बहुत अच्छे तारीखे से बना हो। जो रोज जिम जाता हो। जो रोज ब्याम करता हो। प्रैक्टिकल तौर से हम इस जैसे व्यक्ति को ही फिजिकली स्ट्रांग कहेंगे।
पर केया आप उस व्यक्ति को फिजिकली स्ट्रांग कहेंगे? जो कि दिखने में बाहर से मजबूत लगता हो। पर अंदर से किसी ना किसी रोग से जूझ रहा हो। हम कभी भी इन जैसे व्यक्ति को फिजिकली स्ट्रांग नहीं कहेंगे। किउकी उ जितने भी बाहर से धिखने में स्ट्रांग लगे ओ अंदर से उतने ही खोखले होते है। सायाद इए लोग कुछ बक्त के लिए मुश्किल से मुश्किल काम कर लेते है। लेकिन बाद ओ धीरे धीरे हार मान लेते है। 
अर्थात हम फिजिकली स्ट्रांग उनको ही कहेंगे जो अंदर बाहर दोनों तरफ से ही स्ट्रांग हो। जो बाहर से सक्त हो। ओर अंदर से भी उनका इम्यूनिटी सिस्टम भी सही हो।

मेंटली स्ट्रांग किसे कहेंगे?

पहली बात तो इए हाय की अप किसी को देखकर नहीं बता पाएंगे की उ मेंटली स्ट्रांग हाय इए फिर नहीं? कोही बक्ती मेंटली फिट है ईआ फिर नहीं? इसे समझना थोड़ा डिफिकल्ट है।
कोई भी व्यक्ति मेंटली कितना स्ट्रांग है। यह पता चलता है जब वह कोई भी प्रॉब्लम का सामना करता है। जब भी कोई व्यक्ति किसी भी प्रॉब्लम में फसता है तो उसे पहले अपने दिमाग का इस्तेमाल करना पड़ता है। क्योंकि, अगर दिमाग कहेगा कि भाई लड़ो तो आप लड़ेंगे। अगर दिमाग कहेगा कि भाई उससे लड़ना नहीं है तो आप उससे नहीं लड़ेंगे। और दिमाग कहेगा कि भाई ना लड़के तुम भाग जाओ तो आप भाग जाएंगे। तो आप जितने भी शक्तिशाली हो आपको अपना दिमाग का इस्तेमाल करना ही करना है। कोही भी प्रॉब्लम आये आपको मेंटली स्ट्रांग होना है।
चलिए आप मेंटली कितना स्ट्रांग है इसका एक छोटा सा एग्जांपल रखते हैं। हम यहां पर मान लेते हैं आप मेंटल और फिजिकली दोनों तरफ से ही स्ट्रांग हो।
आप एक जंगल से जा रहे हैं। और उसी वक्त एक शेर आपके सामने आ जाता है। तो उस वक्त आप क्या करेंगे? शेर से लड़ेंगे या? या फिर भाग जाएंगे? या फिर आप पेड़ पर चढ़ जाएंगे?
अगर आपको लगता है आप बहुत शक्तिशाली हैं, जोकि आप है। आप किसी से डरते नहीं है। और इसीलिए आपका दिमाग आपको कह रहा है, “भाई तू खड़े रहकर शेर से लड़।” और आप खड़े हो जाते हैं। पर क्या असली जिंदगी में यह सच है? कि आप शेर के सामने खड़े होकर आप शेर से लड़ाई करके बच सकते हैं। नहीं ना।
तो पहले किससे में आपका जो मेंटल डिसिशन है, वह काम नहीं आया। क्योंकि आप जो डिसीजन लिया वह गलत साबित हुआ। और भूखे सेर ने आपको अपना नास्ता बना लिया।
दूसरे बार में आपने सोचा बहुत सोचा। भाई सामने शेर है, चलो भाग चलें। आपके मेंटल डिसिशन आपको कहता है, “भाई तू भाग चल। तू इससे लड़ेगा तो मरेगा।” शायद आप भागकर एक सुरक्षित जगह पहुंच भी जाए, बहुत कष्ट सहकर। पर क्या इस बार में भी आप पूरी तरह सफल हो पाएंगे? असली जिंदगी में यह नामुमकिन की बराबर है। पर हो सकता है दूसरे केस में आपका मेंटल डिसिशन आपको जो डिसाइड करने के लिए कहा वह कुछ हद तक सही भी हो सकता है। और कुछ हद तक वह गलत भी हो सकता है।
दूसरे बार से यह पता चलता है कि आपका दिमागी हालत, आपका मेंटल कंडीशन, आपका मेंटल स्ट्रांग पहले बार से ज्यादा है। पर इतना ज्यादा नहीं कि खुद को सुरक्षित रख सकें।
अब तीसरी बार आपके सामने फिर से एक शेर ही खड़ा हुआ है। और आपका दिमाग आपको कह रहा है, “भाई तू शक्तिशाली है। यह मैं मानता हूं। तुझ में बहुत साहस है यह भी मानता हूं। पर भाई सामने शेर है। भाई तू पेड़ पर चढ़। नहीं तो सुबह-सुबह शेर तेरे को नाश्ता बना जाएगा।” और साथ ही साथ आप पेड़ पर चढ़ जाते हैं और बच जाते हैं।
यह जो तीन कहानी हमने आपको सुनाई इससे एक ही बात साबित होती है, एक ही बात पता चलता है, कि आप कितना मेंटली स्ट्रांग है। 

आप कितना मेंटली स्ट्रांग है?

दुनिया में ऐसी कोई प्रॉब्लम नहीं है, जिसका आप सलूशन नहीं कर पाए। बड़े से बड़े प्रॉब्लम का सामना करने का हिम्मत मनुष्य के पास है। पर प्रॉब्लम सलूशन करना बहुत आसान भी होता है। और बहुत कठिन भी होता है।
कुछ लोग दुनिया में ऐसे होते हैं, जो प्रॉब्लम को देखकर भागने लगते हैं। कहते हैं, “भाई इतना बड़ा बड़ा प्रॉब्लम है, मैं नहीं कर पाऊंगा, मुझसे होगा नहीं।” और भाग जाते हैं। प्रॉब्लम को देख कर भाग जाना यह आपका मेंटल स्ट्रेंथ के खिलाफ है।  मतलब सीधी सी बात में कहा जाए तो, आपका जो मेंटल है आपका जो दिमाग है उतना प्रेशर ले ही नहीं पा रहा है। जिससे आप उस प्रॉब्लम को सॉल्व कर सकें। मतलब आपको जो मेंटल मसल्स है ओ थोड़ा हिला हुआ है। उसको ठीक करने की जरुरत है।
दूसरी तरफ वह लोग जो प्रॉब्लम को देखकर भागते नहीं है। प्रॉब्लम के सामने खड़े होकर पहले यह सोचते हैं की प्रॉब्लम कहां से आया है। वह प्रॉब्लम कि उस जड़ तक पहुंचते हैं, जहां से उसका पैदा हुआ है। और वह लोग उस प्रॉब्लम को वहां से ही खींचकर निकालते हैं और बाहर फेंकते हैं।
अगर रिलेशनशिप में आपको अपनी जीएफ के साथ झगड़ा हो गया है कोई भी प्रॉब्लम को लेकर। तो अब क्या करेंगे? उसे झगड़ा करेंगे? या उसको मनाएंगे? दोनों में सब कुछ नहीं कर पायंगे। क्योंकि अगर आप उससे झगड़ा करेंगे तो वह और गुस्सैल हो जाएगी। पर अगर आप उसको मनाने जाएंगे तो वह नखरे दिखाएगी। नखरे दिखाना अलग बात है। तो आपको क्या सलूशन चाहिए। 
आप पहले तो यह सोचेंगे कि भाई रिलेशनशिप में यह जो झगड़ा हो रहा है इसका कारण कौन है। आप झगड़े का कारण तक जाएंगे। और साधारण सी बात है अगर झगड़े का कारण आप हो, तो आपको सॉरी बोल देना है। यहीं पर खत्म हो जाएगा। पर अगर झगड़े का कारण आपका गर्लफ्रेंड हो तो भी आप को सॉरी बोलना पड़ेगा। अगर आप कहेंगे गलती उसकी है तो ओ  मानेगी नहीं। किउकी प्रॉब्लम को समझ आपको आया है और सोल्वे भी आपको ही करना है। 

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