अपने जीवन के सफर में सही डिसिशन कैसे लें

हमारे जीवन का जो सफर है वह बहुत लंबा चलता है। इस लंबे सफर में हमें कुछ प्रॉब्लम का सामना करना पड़ता है। प्रॉब्लम का सामना करने वक्त हमें कुछ डिसीजन भी लेना पड़ता है। कई बार तो यह प्रॉब्लम आसानी से सॉल्व हो जाते हैं।
लेकिन ऐसा भी एक वक्त आता है जहां पर यह प्रॉब्लम एक बड़ा दीवार आपके रास्तों के सामने खड़ी कर देती है। तब भी आपको एक डिसिशन लेकर उस प्रॉब्लम को सॉल्व करना ही पड़ता है। नहीं तो आप उस रास्ते से आगे नहीं बढ़ सकते हैं।
पर इस तरह का जो प्रॉब्लम है उसमें अगर आप फंस जाते हैं तो आपके दिमाग में दो डिसिशन आती है। क्योंकि जब भी हम लोग किसी बड़े मुसीबत में फंसते हैं तब हम को अच्छा और बुरा दोनों को ही सोचना पड़ता है गहराई से। और सोचते सोचते हम यह दुविधा में फंस जाते हैं कि कौन सा डिसिशन सही है और कौन सा डिसिशन गलत।
बेशक आप अपने प्रॉब्लम की हल निकालने के लिए आप अपने आसपास के लोगों से बात करते हैं। अपने प्रॉब्लम को उनसे साझा करते हैं, और उनसे पूछते हैं कि आपको कौन से डिसिशन लेना चाहिए।
पर अगर आप खुद से पूछेंगे तो आपको पता चलेगा कि, आप जब ही ऐसे कोई दुविधा में फंसे हैं तो आपने दूसरों से ज्यादा खुद पर ही भरोसा किया है। दूसरों के डिसिशन आप अपने प्रॉब्लम के लिए अप्लाई ना करके, आपको जो डिसिशन अच्छा लगता है आप वही डिसिशन अप्लाई करते हैं।
पर यार दोस्तों अगर आप अपनी प्रॉब्लम का हल खुद ही ढूंढते हैं। तो आप क्यों दूसरों के राय लेते हैं? हां उनसे पूछताछ करना, उनसे जानकारी लेना यह बात तो सही है। पर क्या आपको नहीं लगता है जब आप दूसरे के डिसिशन आप अपने प्रॉब्लम के लिए अप्लाई नहीं करते हैं तो उनका ईगो आप फ्री मे हार्ट कर देते है।
आप जिन लोगों से अपने प्रॉब्लम का सलूशन पूछते हैं वह यह तो सोच ही सकते हैं कि अगर आप अपने प्रॉब्लम का हल खुद ही निकाल रहे हैं तो आप क्यों उन लोगों का समय बर्बाद कर रहे हैं।
पर हम यह बात आपको मना नहीं करेंगे कि आप अपने प्रॉब्लम के लिए कोई भी क्वेरी होगा तो उनसे ना पूछें। आप जरूर उनसे वह सभी प्रश्न पूछ सकते हैं जो कि आपके प्रॉब्लम के लिए महत्वपूर्ण रहता है।

तो चलिए आपको हम बताते हैं, आप अपने जीवन के सफर में सही डिसिशन कैसे ले सकते हैं?

आप जितना भरोसा दूसरों के ऊपर दिखाते हैं। आप अगर इतना भरोसा खुद के ऊपर, अपने परिवार के ऊपर दिखाते। तो आपको शायद कोई प्रॉब्लम का सामना ही नहीं करना पड़ता। क्योंकि आप तो यह बात अवश्य जानते हैं कि, आपका परिवार हर वक्त आपके साथ रहता है। आसपास के लोग आपके साथ रहे या ना रहे। पर आपको परिवार आपके साथ कभी नहीं छोड़ेगा। बुरे हालत में भी नहीं छोड़ेगा|

डिसिशन लेने के तरीके

हम आपको तीन ऐसे उपाय के बारे में बताएंगे, अगर आप यह दो बात को फॉलो करेंगे तो आप कोई भी प्रॉब्लम का एक सही डिसिशन ले पाएंगे।
  1. प्रॉब्लम को समझना।
  2. डिसिशन के लक्ष्य को स्थिर करना।
  3. वैल्यू काउंट करना।

प्रॉब्लम को समझना।

पहले तो आप अपने प्रॉब्लम को ठंडे दिमाग से एक जगह पर बैठकर सोचिए। यह प्रॉब्लम क्यों आपके जीवन में आया है? और क्या क्या करने से यह प्रॉब्लम जा सकता है। साथ ही साथ यह भी सोचिए अगर यह प्रॉब्लम आपके जीवन में रहता है तो क्या और भी प्रॉब्लम में आप फस सकते हैं?

डिसिशन के लक्ष्य को स्थिर करना।

अगर आपने एक जगह बैठकर ठंडे दिमाग से प्रॉब्लम को समझ लिया हो। तो आप अपने लक्ष्य को अब स्थिर कीजिए। लक्ष्य को आप कैसे स्थिर करेंगे? आपने प्रॉब्लम को समझकर जो डिसीजन लिया है। उस डिसिशन को स्थिर कीजिए अपने लक्ष्य के लिए। अगर आप अपने लक्ष्य से बाहर हो जाएंगे तो आप कभी भी अपने प्रॉब्लम का सलूशन नहीं कर पाएंगे। और आप जो भी डिसीजन लेंगे वह सब बेकार हो जाएगा।

वैल्यू काउंट करना।

अभी अगर आपने लक्ष्य को स्थिर कर लिया है। तो आपके पास एक लास्ट और महत्पूर्ण ऑप्शन बचा है। आप अपने प्रॉब्लम के लिए एक डिसिशन लेते हैं पर आपके मन में दुविधा है कि यह डिसिशन जो आपने लिया है, वह सही है या फिर नहीं।
तो पहले अपने डिसिशन के वैल्यू अकाउंट कीजिए। मतलब है, आपने जो डिसीजन लिया है, उसका पॉजिटिव और नेगेटिव की परसेंटेज कितना है ?
हम आपको एक उदाहरण देकर समझाते हैं। आपको जोर से भूख लग रहा है। आपके पास एक कंडीशन है। आपको एक ही रोटी दिया गया है खाने के लिए। पर आपको वह रोटी रात को भी चाहिए। क्योंकि आपको सुबह में भूख लगा है और आपको रात में भी भूख लगेगा। मगर आप आपने उस रोटी को सुबह ही खा लिया है।  आपका भूख इतना तेज था कि आपको यह सोचने का वक्त ही नहीं दिया कि आप रात में क्या खाएंगे।
यह तो हो गया जल्दबाजी में डिसिशन लेना। दूसरी तरफ अगर आप 5 मिनट बैठ कर एक योजना बनाते हैं। जहां पर आप रोटी को आधा करते हैं। आधा रोटी आप सुबह खाते हैं, आधा रोटी आप रात के लिए रख देते हैं।
इस डिसिशन में आपको पेट भर कर खाना नहीं मिला। पर आपको दूसरी तरफ खाना ना खा कर सोना भी नहीं पड़ा। तो आपही बताइए आप जो प्रॉब्लम में फस गए थे। उनमें आपको कौन सा डिसिशन लेना सही था। पहला वाला ? जिसमें आप एक बार में ही पूरे रोटी खा लेते हैं। और रात को ना खाकर आपको सोना पड़ रहा था। और दूसरे डिसिशन में आपको दो वक्त खाना तो मिला, पर आपको पेट भर खाने का मौका नहीं मिला।
तो इसमें कौन से डिसिशन में लाभ कितना है और लॉस कितना है ? पहले वाले में आपका जो लाभ था, वह 30% था। क्योंकि आपने एक ही बार में पूरे रोटी को खा लिया। पर आपको रात को खाना नहीं मिला। यह भी हो सकता था आपके लिए, अगर आप रात को रोटी ना खाए तो आप मर जाते हैं। पर आपके साथ यह नहीं हुआ। इस जगह पर खड़े होकर आपको क्या लग रहा है? आपने जो पहला डिसिशन लिया था, उसमें आपका अच्छाई कितना था और बुराई कितना था।
दूसरी तरफ आपने एक रोटी को आधा आधा करके दो वक्त खाया, जिसमें आपको पूरा पेट नहीं भरा, पर फिर भी आपको ना खाकर सोना भी नहीं पढ़ा और आप मरने से भी बच गए। इसमें आपका अच्छा 90 प्रतिशत है। क्योंकि आपने रोटी को जब भी आधा करके दो वक्त के लिए बना लिया। तभी आपका जीने का टाइम बढ़ गया। दूसरे कंडीशन में आप का मरने का कोई भी सवाल ही नहीं उठता है।
Moral : यह पूरे कहानी से हम आपको सिर्फ यही समझाना चाहते हैं कि आप जब ही कोई भी डिसीजन ले उसका अच्छाई और बुराई उसका पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों को ही देखिए।

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